ईद के तोहफे का लालच पड़ा भारी, बुजुर्ग महिला से साइबर ठगों ने लूटे ₹24 लाख।
ईद के तोहफे का झांसा देकर 61 वर्षीय महिला से ₹24 लाख की साइबर ठगी…..
नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने ईद के तोहफे का लालच देकर 61 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला से करीब ₹24 लाख ठग लिए। पीड़िता को सोशल मीडिया के जरिए एक व्यक्ति ने दोस्ती के जाल में फंसाया और बाद में कथित तौर पर खुद को CBI अधिकारी बताने वाले लोगों ने उससे अलग-अलग नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, कोराडी की रहने वाली महिला को 21 मई को सोशल मीडिया पर ‘Aryan’ नाम के व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे आरोपी ने महिला का भरोसा जीत लिया।
इसके बाद उसे बताया गया कि ब्रिटेन से उसके लिए ईद का एक महंगा गिफ्ट भेजा गया है। लेकिन कहानी में अगला मोड़ तब आया, जब कथित तौर पर कहा गया कि गिफ्ट वाला पार्सल मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम/क्लीयरेंस प्रक्रिया में अटक गया है।
इसके बाद ठगों ने महिला से टैक्स, कस्टम क्लियरेंस और कूरियर चार्ज के नाम पर पैसे मांगने शुरू किए।
CBI अधिकारी बनकर बढ़ाया डर
ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को CBI अधिकारी ‘Sunil’ और कूरियर कंपनी से जुड़े लोगों के रूप में पेश किया। महिला को अलग-अलग QR कोड और बैंक खातों की जानकारी भेजी गई और भुगतान करने के लिए दबाव बनाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने अगस्त की शुरुआत से 20 अगस्त तक कई किस्तों में करीब ₹24 लाख ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद कोई गिफ्ट नहीं पहुंचा। तब जाकर उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने साइबर पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने मामले में कथित आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
असली खतरा ‘गिफ्ट’ नहीं, भरोसा जीतने की रणनीति है
इस घटना को सिर्फ एक सामान्य ऑनलाइन ठगी समझना गलत होगा। इसमें साइबर अपराधियों ने Social Engineering का इस्तेमाल किया—यानी तकनीकी हैकिंग से ज्यादा इंसानी भावनाओं और भरोसे को निशाना बनाया।
ठगों ने कथित तौर पर एक साथ कई मनोवैज्ञानिक हथियार इस्तेमाल किए:
- दोस्ती: पहले सोशल मीडिया पर संपर्क बनाया।
- भावनात्मक लालच: ईद के मौके पर विदेशी गिफ्ट का भरोसा दिया।
- तत्कालता: पार्सल एयरपोर्ट पर अटकने की कहानी बनाई।
- विश्वसनीयता: CBI अधिकारी और कूरियर एजेंट बनने का दावा किया।
- लगातार भुगतान: एक बड़ी रकम की जगह कई किस्तों में पैसे मंगाए।
यही पैटर्न आज के साइबर फ्रॉड की सबसे खतरनाक विशेषताओं में से एक है। सरकारी एजेंसियां भी लगातार चेतावनी देती रही हैं कि अपराधी पुलिस, CBI, RBI और दूसरी सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को डराते या भ्रमित करते हैं।
बुजुर्ग क्यों बन रहे हैं आसान निशाना?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जून 2026 में साइबर-enabled fraud और खासकर digital arrest scams पर चर्चा करते हुए बताया था कि साइबर अपराधों में बुजुर्ग लोग विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। आयोग के अनुसार, अपराधी लीक हुए या अन्य स्रोतों से हासिल व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल करके कमजोर लक्ष्यों को चुन रहे हैं।
हाल के मामलों में भी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, पुणे में 87 वर्षीय व्यक्ति को कथित फर्जी CBI अधिकारियों ने ₹3.46 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया था। आरोपियों ने जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाए।
इससे स्पष्ट है कि उम्रदराज लोगों को सिर्फ डिजिटल सुरक्षा की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। परिवारों को भी उनके साथ वित्तीय सुरक्षा की व्यवस्था बनानी चाहिए—जैसे बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य से पुष्टि और अनजान लोगों से सोशल मीडिया संपर्क को सीमित करना।
एक और बड़ा खतरा: ‘कहानी’ धीरे-धीरे बदलती है
इस तरह की ठगी में अपराधी शुरुआत में सीधे पैसे नहीं मांगते। पहले वे विश्वास बनाते हैं, फिर कोई कहानी तैयार करते हैं और उसके बाद अचानक आर्थिक मांग सामने रखते हैं।
इस मामले में भी कथित तौर पर क्रम कुछ ऐसा रहा:
सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट → दोस्ती → विदेशी गिफ्ट → एयरपोर्ट पर पार्सल अटकना → टैक्स/क्लियरेंस → CBI अधिकारी का दावा → QR कोड/बैंक अकाउंट → लाखों रुपये का नुकसान
यानी साइबर अपराधी एक ही झूठ पर निर्भर नहीं रहते। वे परिस्थिति के अनुसार नई कहानी जोड़ते जाते हैं, ताकि पीड़ित को संदेह न हो।
अगर कोई विदेशी गिफ्ट भेजने की बात करे तो क्या करें?
सबसे महत्वपूर्ण नियम: किसी अनजान व्यक्ति के भेजे कथित गिफ्ट को छुड़ाने के लिए टैक्स, कस्टम, कूरियर या क्लियरेंस के नाम पर निजी बैंक खाते या QR कोड पर पैसा न भेजें।
अगर कोई व्यक्ति खुद को CBI, पुलिस, RBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो फोन पर उसकी पहचान पर भरोसा न करें। आधिकारिक माध्यम से संबंधित संस्था से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें।
सरकारी National Cyber Crime Reporting Portal पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
अगर पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं
देरी न करें। तुरंत:
- 1930 पर कॉल करें।
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तत्काल सूचना देकर ट्रांजैक्शन/खाते पर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहें।
- चैट, मोबाइल नंबर, QR कोड, बैंक विवरण और ट्रांजैक्शन की स्क्रीनशॉट/रसीद सुरक्षित रखें।
- ठगों से आगे कोई भुगतान या बातचीत न करें।
I4C के पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल, बैंक अकाउंट, वेबसाइट और सोशल मीडिया पहचान से जुड़ी जानकारी जांचने/रिपोर्ट करने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष
नागपुर की यह घटना बताती है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या लिंक तक सीमित नहीं रही। अपराधी अब रिश्ते, त्योहार, विदेशी गिफ्ट, सरकारी अधिकारी और कूरियर जैसी विश्वसनीय दिखने वाली कहानियों का इस्तेमाल करके लोगों का भरोसा जीत रहे हैं।
इस मामले में कथित तौर पर ₹24 लाख का नुकसान किसी तकनीकी हैकिंग से नहीं, बल्कि भरोसे और मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए हुआ। इसलिए ऑनलाइन सुरक्षा का सबसे जरूरी नियम है—अनजान व्यक्ति की कहानी कितनी भी भरोसेमंद लगे, पैसे भेजने से पहले स्वतंत्र रूप से उसकी पुष्टि जरूर करें।
