101 गिरफ्तार, 1,172 साइबर लिंक का खुलासा—क्या आपके बैंक खाते का इस्तेमाल भी किसी ठगी के लिए हो रहा है?
101 गिरफ्तार, 1,172 साइबर लिंक और ₹17 करोड़ का लेन-देन… दक्षिण भारत में साइबर ठगी के नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा…..
साइबर ठगी अब सिर्फ किसी एक ठग या एक फर्जी मोबाइल नंबर की कहानी नहीं रह गई है। इसके पीछे बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग, बिचौलिए, फर्जी लेन-देन कराने वाले एजेंट और अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क काम कर रहे हैं। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की हालिया कार्रवाई ने इसी नेटवर्क की एक बड़ी तस्वीर सामने रखी है।
Telangana Cyber Security Bureau यानी TGCSB ने दो हफ्ते तक चले एक बड़े अंतरराज्यीय ऑपरेशन में 101 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में इन लोगों से जुड़े बैंक खातों के जरिए करीब ₹17 करोड़ के संदिग्ध साइबर अपराध लेन-देन का पता चला है। इस कार्रवाई में देशभर में 1,172 साइबर क्राइम लिंक सामने आए हैं। इनमें से 206 लिंक तेलंगाना से जुड़े बताए गए हैं।
यह ऑपरेशन 23 सितंबर 2026 से शुरू हुआ था और इसमें केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी को शामिल किया गया। TGCSB ने कार्रवाई के लिए 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की छह विशेष टीमें लगाईं। यह TGCSB की दूसरी ऐसी बड़ी simultaneous multi-state कार्रवाई बताई गई है।
सबसे बड़ा सवाल—ये लोग करते क्या थे?
जांच के केंद्र में है एक बेहद महत्वपूर्ण साइबर अपराध व्यवस्था—“Mule Bank Account”।
सरल भाषा में समझें तो जब किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो ठग आमतौर पर पैसा सीधे अपने खाते में नहीं मंगाते। इसके बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे खाते को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
TGCSB के मुताबिक, साइबर ठगों तक ऐसे खाते पहुंचाने के लिए एजेंट और बिचौलिए काम कर रहे थे। पीड़ित से ठगा गया पैसा पहले इन खातों में आता, फिर उसे ATM से निकाला जाता, दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता या कुछ मामलों में विदेश से जुड़े लेन-देन के रास्ते आगे भेजा जाता था।
जांच में गिरफ्तार लोगों में 19 एजेंट और 81 म्यूल अकाउंट होल्डर की पहचान की गई है। आरोप है कि खाते उपलब्ध कराने या पैसा घुमाने के बदले संबंधित लोगों को लेन-देन की रकम का 5 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।
यही वह जगह है जहां आम लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा छिपा है।
कई बार किसी व्यक्ति को यह कहकर बैंक खाता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाता है कि उसे सिर्फ कमीशन मिलेगा और कोई जोखिम नहीं होगा। लेकिन अगर उसी खाते से साइबर ठगी का पैसा गुजरता है, तो खाताधारक जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकता है।
गिरफ्तार लोगों का प्रोफाइल भी चौंकाने वाला
यह मामला सिर्फ बेरोजगार युवाओं या अपराध की दुनिया से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं दिखता।
जांच में अलग-अलग पेशों और शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले लोग सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इनमें प्राइवेट कर्मचारी, कारोबारी, पूर्व सैनिक, गृहिणियां, ड्राइवर, सेल्स कर्मचारी, ग्रेजुएट और MBA डिग्रीधारी लोग भी शामिल हैं।
कुछ आरोपियों के खिलाफ कई राज्यों में पहले से साइबर अपराध के लिंक भी मिले हैं।
मसलन, एक Flipkart कर्मचारी के बैंक खाते को कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया और उसका लिंक 50 मामलों से बताया गया है।
एक कारोबारी का संबंध 34 साइबर अपराध मामलों से, फिल्म टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा रखने वाले एक आरोपी का 26 मामलों से और एक MBA डिग्रीधारी मार्केटिंग हेड का 15 मामलों से लिंक बताया गया है। एक पूर्व सैनिक का भी छह साइबर अपराध मामलों से संबंध सामने आया है।
इसके अलावा, जांच में NGO और ट्रस्ट के नाम पर खोले गए खातों के कथित दुरुपयोग की बात भी सामने आई है। ऐसे खातों का संबंध 60 साइबर अपराध मामलों से जोड़ा गया है।
किस राज्य से कितनी गिरफ्तारियां?
TGCSB के अनुसार गिरफ्तारियों में सबसे ज्यादा लोग केरल से पकड़े गए।
- केरल — 35
- आंध्र प्रदेश — 22
- कर्नाटक — 17
- तमिलनाडु — 14
- तेलंगाना — 12
- पुडुचेरी — 1
कुल संख्या 101 है। इनमें 18 महिलाएं भी शामिल हैं।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कई मोबाइल फोन, SIM कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक भी जब्त की हैं, जिनका कथित तौर पर संदिग्ध लेन-देन में इस्तेमाल हुआ था।
असली खतरा ₹17 करोड़ नहीं, बल्कि 1,172 लिंक हैं
इस पूरी कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा शायद ₹17 करोड़ नहीं, बल्कि 1,172 cybercrime links है।
क्यों?
क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराध का नेटवर्क एक खाते या एक शहर तक सीमित नहीं रहता। एक बैंक अकाउंट किसी एक राज्य में हो सकता है, पैसा दूसरे राज्य के पीड़ित से आ सकता है और कुछ ही मिनटों में तीसरे खाते या किसी दूसरे चैनल में भेजा जा सकता है।
इसी वजह से जांच एजेंसियों के लिए पैसे के पीछे मौजूद नेटवर्क को पकड़ना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
TGCSB के मुताबिक 101 गिरफ्तार लोगों में से 50 के पांच से ज्यादा साइबर अपराध लिंक मिले हैं। यानी कुछ आरोपी केवल एक मामले में इस्तेमाल हुए खाते के मालिक नहीं, बल्कि व्यापक नेटवर्क से जुड़े होने के संदेह में जांच के दायरे में हैं।
साइबर अपराध का नया मॉडल समझना जरूरी
आज ऑनलाइन ठगी का मॉडल तेजी से बदल रहा है।
पहले ठग को पकड़ने का मतलब अक्सर उस व्यक्ति तक पहुंचना होता था जिसने फोन किया या मैसेज भेजा। लेकिन अब पूरा सिस्टम कई हिस्सों में बंट सकता है—
पीड़ित → ठग → म्यूल अकाउंट → एजेंट/बिचौलिया → दूसरा बैंक खाता → ATM/ट्रांसफर → आगे का नेटवर्क
इस पूरी श्रृंखला में हर व्यक्ति की भूमिका अलग हो सकती है।
यही वजह है कि म्यूल अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण infrastructure बन चुके हैं।
और यही कारण है कि पुलिस की यह कार्रवाई केवल 101 गिरफ्तारियों की खबर नहीं है। यह उस आर्थिक ढांचे पर कार्रवाई है जिसके जरिए ठगी का पैसा तेजी से एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाया जाता है।
आम आदमी के लिए सबसे जरूरी सबक
अगर कोई व्यक्ति आपको अपना बैंक अकाउंट किसी दूसरे के इस्तेमाल के लिए देने, OTP साझा करने, ATM कार्ड या चेकबुक सौंपने या कमीशन के बदले पैसा रिसीव करके आगे भेजने का ऑफर देता है, तो इसे सामान्य कमाई का तरीका समझना भारी पड़ सकता है।
“सिर्फ अकाउंट दिया था, ठगी मैंने नहीं की”—यह सफाई जांच में पर्याप्त साबित होगी या नहीं, यह मामले के तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए बैंक खाता, SIM, UPI या डिजिटल पहचान किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने देना बेहद जोखिम भरा है।
तेलंगाना सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक Telangana Cyber Security Bureau राज्य में साइबर अपराध की जांच, साइबर खतरे की पहचान, प्रशिक्षण और अन्य राज्यों व राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय की भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
तेलंगाना की इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर ठगी का मुकाबला केवल ठग का फोन नंबर बंद करने से नहीं होगा। पैसे की पूरी ट्रेल, म्यूल अकाउंट, एजेंट, बिचौलिए और अंतरराज्यीय कनेक्शन तक पहुंचना जरूरी है।
101 गिरफ्तारियां, ₹17 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन और 1,172 साइबर लिंक इस बात का संकेत हैं कि डिजिटल फ्रॉड अब स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि राज्यों की सीमाओं से बाहर फैला हुआ संगठित नेटवर्क बन चुका है।
TGCSB ने कहा है कि जांच अभी जारी है और आगे अतिरिक्त अपराध लिंक, अंतरराज्यीय कनेक्शन तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान की जा रही है। यानी यह कार्रवाई संभवतः इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर का सिर्फ पहला हिस्सा है।
