डिजिटल अरेस्ट स्कैम (2025–2026): कानून का डर दिखाकर ठगी का नया जाल……
🕵️♂️ क्या है मामला???
साल 2025–26 में देशभर में “डिजिटल अरेस्ट” नाम से एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ा। इस ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या कस्टम विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल हिरासत” में लेने का नाटक करते हैं और डराकर पैसे ऐंठ लेते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, कई गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से संचालित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय जाल: ये ठग केवल अपराधी नहीं हैं, बल्कि दक्षिण-पूर्वी एशिया (कंबोडिया, म्यांमार, लाओस) में ‘साइबर फैक्ट्रियां’ चला रहे हैं। यहाँ तक कि कई भारतीयों को वहां नौकरी के नाम पर ले जाकर गुलाम बनाया गया और उनसे जबरन भारतीयों को फोन करवाकर ठगी करवाई जा रही है।
📍 मामला कब दर्ज हुआ?
- 16 अक्टूबर 2025 को 62-साला व्यक्ति ने हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस को मामला दर्ज कराया।
- हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने तीन साइबर ठगों (fraudsters) को गिरफ्तार किया है।
- आरोप है कि उन्होंने एक 62 वर्षीय व्यक्ति को फँसाकर ₹1.07 करोड़ का नुकसान कराया।
- पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।
- इस धोखाधड़ी को “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” कहा जाता है।
- डिजिटल साक्ष्य (मोबाइल, बैंक खाते, ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन आदि) की जांच के बाद आरोपियों की पहचान कर दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
☎️ ठगी कैसे हुई?
- पीड़ित को पहले फोन कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उसके आधार व मोबाइल नंबर का उपयोग अवैध गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
- फिर उसे एक फरज़ “इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर” से जोड़ा गया जो खुद को कानूनी अधिकारी बता रहा था।
- उसने नकली जाँच रिपोर्ट और फर्जी इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज दिखाए गए
- उन्हें डराया गया कि अगर उन्होंने तुरंत पैसे नहीं दिए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- उसके बाद पीड़ित ने कुल ₹1.07 करोड़ बैंक के ज़रिये स्थानांतरित कर दिए।
👤 आरोपियों की पहचान
- गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों के नाम और विवरण:
✔️ गुरदीप सिंह (42) उर्फ लकी नारंग – मनी एक्सचेंज और ट्रैवल बिजनेस में काम करता था
✔️ हरप्रीत सिंह (36) उर्फ करण कौशिक / विराज – RO तकनीशियन
✔️ कुमार मोहित (30) उर्फ मोहित कौशिक – एक नया फूड बिजनेस शुरू करने वाला
(ये सभी दिल्ली के निवासी बताए गए हैं) .
📍अन्य जुड़े लोग और मोनेटरी रूट
- अदालत ने पाया कि कुछ अन्य सहयोगियों ने बैंक अकाउंट्स और क्रेडेंशियल्स मुहैया कराए थे जिन्हें धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया गया।
- इन खातों का उपयोग कई राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के लिए किया गया था।
- हालिया रिपोर्टों (2025-2026) के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट स्कैम अब केवल एक ठगी नहीं बल्कि एक “संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध” बन चुका है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय और साइबर सुरक्षा एजेंसियों (I4C) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और समाचारों के आधार पर इस खबर का विस्तृत विश्लेषण यहाँ दिया गया है.
🧠 क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
- खुद को पुलिस, कोर्ट, खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते है
- .बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म: वे आपको डराते हैं कि आप किसी को फोन न करें, वरना आपको तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। इसे ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है। कहा जाता है कि “जांच पूरी होने तक आप डिजिटल अरेस्ट में हैं, कॉल नहीं काट सकते।”
- पैसे की मांग: मामले को ‘रफा-दफा’ करने के लिए वे आपसे एक ‘सुरक्षा राशि’ (Security Deposit) मांगते हैं, जिसे वे बाद में वापस करने का वादा करते हैं, लेकिन वह पैसा कभी वापस नहीं आता।
- डर पैदा कर “जुर्माना”, “सुरक्षा जमा” या “वेरिफिकेशन फीस” के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े (2025-2026)
- आर्थिक नुकसान: अनुमान है कि भारतीय नागरिकों ने इस घोटाले में लगभग ₹2,000 करोड़ गंवाए हैं।
- ठगी का केंद्र: जांच में पाया गया है कि इन घोटालों के तार दक्षिण-पूर्वी एशिया (जैसे कंबोडिया, म्यांमार और लाओस) के ‘साइबर सिंडिकेट’ से जुड़े हैं।
- शिकार: इसमें सिर्फ कम पढ़े-लिखे बुजुर्ग, गृहिणियां, छात्र और नौकरीपेशा लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, रिटायर्ड अफसर और आईटी प्रोफेशनल भी शिकार बन रहे हैं।
💳 साइबर क्राइम/ठगी का तरीका 👇
ये फ्रॉडर्स आम-तौर पर यह करते हैं:
- ठग व्हाट्सऐप/स्काइप/वीडियो कॉल पर नकली वर्दी या ऑफिस बैकग्राउंड दिखाते हैं।
- झूठा आरोप: वे दावा करते हैं कि आपके नाम से आए किसी पार्सल में ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या सिम कार्ड पाए गए हैं। पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग या बैंक फ्रॉड जुड़ा है।
- पीड़ित को फ़ोन, SMS या WhatsApp पर संपर्क करते हैं
- फेक कॉल (धमकी):पहला कॉल – खुद को पुलिस/सीबीआई(CBI,/ईडी/ कोर्ट या सरकारी एजेंसी का अधिकारी का अधिकारी बताते हैं
- डराना –धमकी और डर के ज़रिये पैसे देने का दबाव डालते हैं, गिरफ्तारी वारंट, सुप्रीम कोर्ट केस या इंटरपोल नोटिस की झूठी धमकी।
- वीडियो कॉल पर ‘कैद’: वे आपको Skype या WhatsApp वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करते हैं। वे वर्दी और असली दिखने वाले दफ्तरों का इस्तेमाल करते हैं ताकि आप डर जाएं। अलग-थलग करना – परिवार से बात न करने देना, फोन कैमरा ऑन रखने को कहना।
- ऐसा दिखाते हैं कि आपकी संपत्ति सुरक्षित रहेगी अगर आप अमाउंट भेज देंगे
- बैंक खाते की जानकारी या OTP नहीं माँगते, बल्की पैसे ट्रांसफर करवाते हैं
- तुरंत भुगतान – UPI, RTGS, गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टो के जरिए पैसे मांगना।
- मनी म्यूल अकाउंट – रकम कई खातों में घुमा कर विदेश भेज दी जाती है।
📌 सरकार और पुलिस की नीति,दिशा,भविष्य की योजना और सुरक्षा उपाय…..
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए ‘वॉर रूम’ तैयार किया है:
🛡️ साइबर सुरक्षा के तहत क्या कानून लागू होते हैं?
निम्नलिखित कानून आमतौर पर साइबर धोखाधड़ी मामलों में लागू होते हैं:
✔️ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act)
✔️ भारतीय दंड संहिता (BNS) — धोखाधड़ी, जालसाजी आदि
✔️ Ministry of Home Affairs के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C)और साइबर अपराध निवारण नियम द्वारा विशेष अभियान।
✔️ Central Bureau of Investigation और राज्य पुलिस की संयुक्त छापेमारी। साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्य/केंद्र में गठित
✔️Cyber Crime Units और National Cyber Crime Reporting Portal
- CBI को विशेष अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के अंत में CBI को पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र अधिकार दे दिए हैं, ताकि उन्हें हर राज्य से अलग से अनुमति न लेनी पड़े।
- सख्ती से ब्लॉक: I4C ने अब तक 83,000 से ज्यादा WhatsApp अकाउंट, 3,900 Skype आईडी और करीब 7.8 लाख सिम कार्ड ब्लॉक किए हैं।
- संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करना और मनी म्यूल नेटवर्क पर कार्रवाई।
- टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर फर्जी सिम कार्ड बंद करना।
- इंटरपोल की मदद :इंटरपोल के जरिए विदेशी ठिकानों पर सहयोग।भारत अब इन अंतरराष्ट्रीय गैंग्स को पकड़ने के लिए Interpol के साथ मिलकर काम कर रहा है।
- I4C सस्पेक्ट रजिस्ट्री: एक नया सिस्टम बनाया गया है जिसमें संदिग्ध ठगों के फोन नंबर और बैंक खातों का डेटा रीयल-टाइम में बैंकों के साथ साझा किया जाता है ताकि ट्रांजैक्शन रुक सके।
इन नियमों के आधार पर धोखाधड़ी दर्ज की जाती है और आरोपियों पर मुक़दमे चलाए जाते हैं।
ठगों के नए और खतरनाक तरीके (Modus Operandi)
ठग अब और भी शातिर हो गए हैं:
- वर्चुअल कोर्टरूम: ठग वीडियो कॉल पर पीछे का बैकग्राउंड बिल्कुल असली कोर्टरूम या पुलिस स्टेशन जैसा बना लेते हैं।
- AI और Deepfake: ठग अब जज, बड़े पुलिस अफसरों या यहाँ तक कि आपके किसी रिश्तेदार की आवाज और चेहरा (Deepfake) बनाकर कॉल करते हैं ताकि आप डर जाएं।
- अदृश्य जेल (Digital Surveillance): आपको 24 से 48 घंटे तक कैमरा ऑन रखने को कहा जाता है। वे आपको सोने या किसी से बात करने की अनुमति नहीं देते, जिससे पीड़ित मानसिक रूप से टूट जाता है।
- म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts): ठगी का पैसा तुरंत हजारों छोटे-छोटे बैंक खातों में भेज दिया जाता है, जिससे पुलिस के लिए पैसा रिकवर करना नामुमकिन हो जाता है।
सरकारी एक्शन प्लान और पॉलिसी (Action Plan & Policy)
🛡️ सरकार और टेलीकॉम विभाग की पहल
📍 केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग द्वारा international/suspicious spoof calls को पकड़ने और ब्लॉक करने के लिए तकनीकी सिस्टम लाने की कोशिशें की जा रही हैं, जैसे कि Sanchar Saathi और Chakshu portal के ज़रिये झूठे नंबरों की पहचान और ब्लॉकिंग।
☎️ आम नागरिक क्या कर सकते हैं? सावधानियां/ (सुरक्षा सुझाव)
- भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह से एक धोखाधड़ी है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती
- पुलिस या जांच एजेंसियां हमेशा व्यक्तिगत रूप से सम्मन भेजती हैं या घर आती हैं, वे फोन पर पैसे का लेनदेन नहीं करतीं।
- कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल में कोई ऐप (जैसे AnyDesk या TeamViewer) इंस्टॉल न करें।
- किसी भी कॉल को सरकारी अधिकारी की बात मानकर तुरंत पैसे न दें
- अज्ञात नंबर से धमकी मिले तो तुरंत कॉल काटें।
- किसी भी फोन कॉल पर OTP, बैंक डिटेल या स्क्रीन शेयर,आधार आदि कभी न साझा करें
📍 किसी अज्ञात व्यक्ति की सुनिश्चित पहचान होने तक भरोसा न करें
📍किसी भी धमकी की पुष्टि के लिए पहले बैंक या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें
नजदीकी थाने या आधिकारिक वेबसाइट से जांच करें।
✅तुरंत (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर केस दर्ज कराएँ अगर धोखाधड़ी का शिकार हों:
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: 1930
- पोर्टल: www.cybercrime.gov.in
⚠️ यह सिर्फ एक घटना नहीं — देशभर में फैलता धोखा
🔎 सिर्फ यह मामला ही नहीं है, “डिजिटल अरेस्ट” से जुड़ी बड़ी-बड़ी ठगी घटनाएँ देशभर में लगातार सामने आ रही हैं:
📍 मुंबई में 72 वर्ष के व्यवसायी ने ₹58 करोड़ का नुकसान बताया (fraudsters ने ED/CBI अधिकारी बनकर कॉल किया था).
📍 पुणे में 82 वर्ष के बुजुर्ग से लगभग ₹11 करोड़ का ठगी मामला सामने आया।
📍 चंडीगढ़ में दो लोगों पर ₹77 लाख की डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ।
📍 हैदराबाद में एक 76 वर्षीय व्यक्ति से ₹20 लाख से अधिक की ठगी की शिकायत हाल ही में दर्ज हुई।
📍 कुछ पीड़ितों की शिकायतें इतनी भयावह रहीं कि उन्हें मानसिक तनाव या स्वास्थ्य पर बुरा असर भी पड़ा — एक 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला का दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन होने जैसा मामला भी चर्चा में आया था (अपुष्ट सोशल मीडिया से यह दावा).
👉 इससे स्पष्ट है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम पूरे भारत में फैल रहा है और बड़ी-बड़ी रकम के मामले सामने आ रहे हैं।
📊 संक्षेप में मुख्य बातें
पहलू | विवरण |
घटना | साइबर “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम |
ठगी राशि | ₹1.07 करोड़ (Hyderabad), और देशभर में करोड़ों के मामले |
आरोपियों की पहचान | 3 साइबर फ्रॉडर्स (दिल्ली निवासी) |
अन्य मामले | मुंबई, पुणे, चंडीगढ़ समेत कई बड़े ठगी मामले |
कानून | IT Act, IPC के तहत कार्यवाही |
बचाव | कॉल सावधानी, 1930/portal पर रिपोर्टिंग |
डिजिटल अरेस्ट स्कैम डर और तकनीक का गलत इस्तेमाल है। जागरूकता, तुरंत शिकायत और सरकारी एजेंसियों की सख्त कार्रवाई से ही इस ठगी पर रोक लगाई जा सकती है। आम नागरिकों को समझना होगा कि कानून कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करता, इसलिए घबराने की बजाय सतर्क रहें और सही कदम उठाएं।
