₹1.44 लाख करोड़ का दावा! बी.आर. शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ खोला बड़ा कानूनी मोर्चा।
₹1.44 लाख करोड़ का मुकदमा: B.R. शेट्टी बनाम बैंक ऑफ बड़ौदा, NMC Health विवाद में नया मोड़……
खास रिपोर्ट | 14 अक्टूबर 2026 | कारोबार, बैंकिंग और कानूनी विवाद
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के कारोबारी बी.आर. शेट्टी (B.R. Shetty) ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पक्षों के खिलाफ करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.44 लाख करोड़ के हर्जाने का मुकदमा दायर किया है। यह मामला उनकी कंपनी NMC Health के वित्तीय पतन और कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है।
दूसरी ओर, भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा है कि उसे अभी इस मुकदमे की औपचारिक सूचना नहीं मिली है। नोटिस मिलने पर बैंक कानूनी रूप से अपना पक्ष रखेगा और अपने हितों की रक्षा करेगा।
यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक तरफ अरबों डॉलर के वित्तीय लेन-देन और कथित धोखाधड़ी के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ बैंक की ओर से शेट्टी के खिलाफ करीब ₹2,800 करोड़ की बकाया वसूली की कार्रवाई भी चल रही है। हालांकि, शेट्टी के आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
1. आखिर ₹1.44 लाख करोड़ का दावा क्यों किया गया?
NMC Health के संस्थापक बी.आर. शेट्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर मुकदमे में कुल 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इस राशि को तीन हिस्सों में बांटा है:
- 5 अरब डॉलर — प्रत्यक्ष नुकसान: कारोबार और आर्थिक हितों को हुए कथित सीधे नुकसान की भरपाई।
- 5 अरब डॉलर — अन्य आर्थिक नुकसान: भविष्य के कारोबारी अवसरों और दूसरे कथित वित्तीय नुकसान के लिए।
- 5 अरब डॉलर — प्रतिष्ठा को नुकसान: उनकी कारोबारी छवि और साख को हुए कथित नुकसान के लिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले दो हिस्सों का दावा सभी 26 प्रतिवादियों के खिलाफ है, जबकि प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए मांगा गया तीसरा हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ है। शेट्टी ने इन दावों पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज की मांग भी की है। ये सभी वादी की ओर से मांगी गई रकम हैं, अदालत द्वारा तय किया गया मुआवजा नहीं।
2. बैंक ऑफ बड़ौदा पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
शेट्टी की याचिका में आरोप है कि बैंक के कुछ अधिकारियों और NMC समूह के तत्कालीन अधिकारियों ने ऐसे वित्तीय लेन-देन को संभव बनाया, जिनसे कंपनी के धन के कथित गलत इस्तेमाल और वास्तविक देनदारियों को छिपाने में मदद मिली।
आरोपों में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:
- संदिग्ध लेन-देन: बैंक के माध्यम से NMC समूह से जुड़ी कंपनियों के बीच धन के कथित हस्तांतरण पर सवाल उठाए गए हैं।
- मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी चेतावनियां: शेट्टी का दावा है कि संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चेतावनियां मिलने के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
- जाली हस्ताक्षर और दस्तावेज: उनका आरोप है कि कुछ बैंकिंग निर्देशों और व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दस्तावेजों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर इस्तेमाल किए गए।
- अनधिकृत लेन-देन: याचिका में दावा किया गया है कि कुछ खातों और बैंकिंग निर्देशों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया।
ये आरोप शेट्टी की याचिका में किए गए दावों पर आधारित हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य या बैंक की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। बैंक ने कहा है कि वह मुकदमे का औपचारिक नोटिस मिलने पर मजबूती से अपना बचाव करेगा।
3. NMC Health कंपनी कैसे संकट में फंसी?
NMC Health कभी खाड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी निजी स्वास्थ्य सेवा कंपनियों में से एक थी। इसके अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं UAE सहित कई बाजारों में फैली हुई थीं। कंपनी के संस्थापक बी.आर. शेट्टी भारतीय मूल के कारोबारी हैं, जिन्होंने UAE Exchange जैसे वित्तीय कारोबार भी स्थापित किए थे।
इस कंपनी का संकट दिसंबर 2019 में गंभीर रूप से सामने आया, जब अमेरिकी शॉर्ट-सेलर Muddy Waters ने कंपनी के वित्तीय विवरण, कर्ज और नकदी के आंकड़ों पर सवाल उठाए।
इसके बाद सामने आया कि कंपनी की वास्तविक देनदारियां पहले बताई गई रकम से काफी ज्यादा थीं।
- शुरुआत में कंपनी का कर्ज लगभग 2.1 अरब डॉलर बताया गया था।
- बाद में इसकी देनदारियां बढ़कर करीब 6.6 अरब डॉलर सामने आईं।
- अप्रैल 2020 में ब्रिटेन में सूचीबद्ध NMC Health की मूल कंपनी प्रशासनिक प्रक्रिया (administration) में चली गई। बाद में UAE में उसके कारोबार भी इसी संकट से प्रभावित हुए।
Administration का मतलब: जब कोई कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में आ जाती है, तो उसकी संपत्तियों और कारोबार को संभालने तथा लेनदारों के हितों की रक्षा के लिए एक विशेष प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, कॉरपोरेट निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बड़े सवाल खड़े किए।
4. बैंक ऑफ बड़ौदा ने पहले ही ₹5,700 करोड़ का समझौता किया था
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू जून 2026 में हुआ समझौता है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा ने NMC समूह के संयुक्त प्रशासकों के साथ लगभग 600 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹5,700 करोड़ के समझौते पर सहमति दी थी।
इस समझौते का उद्देश्य NMC से जुड़े पहले के कानूनी दावों का निपटारा करना था। रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते में बैंक ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी।
अब शेट्टी की नई याचिका इसी व्यापक वित्तीय विवाद से जुड़े लेन-देन पर सवाल उठा रही है। उनका तर्क है कि बैंक के खिलाफ किए गए दावों और बैंक की ओर से उनसे वसूली की जा रही रकम के बीच भी कानूनी सवाल उठते हैं।
लेकिन यहां एक अंतर समझना जरूरी है: समझौते के तहत भुगतान करना अपने आप में धोखाधड़ी में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। इसी तरह, समझौता हो जाने से किसी तीसरे पक्ष के सभी अलग-अलग दावे अपने आप सही या गलत साबित नहीं हो जाते।
5. बैंक खुद शेट्टी से ₹2,800 करोड़ की वसूली क्यों चाहता है?
बैंक ऑफ बड़ौदा का कहना है कि वह भारत और UAE में शेट्टी से लगभग ₹2,800 करोड़ की बकाया रकम वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई कर रहा है। बैंक के मुताबिक, इस संबंध में उसे कई कानूनी आदेश भी मिल चुके हैं।
बैंक ने यह भी कहा है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2021 में शेट्टी को अपनी संपत्तियों के हस्तांतरण या निपटान पर रोक से संबंधित आदेश दिया था। बैंक के अनुसार, बाद की दिवाला कार्यवाही में शेट्टी ने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर भुगतान करने में असमर्थता जताई थी।
इसके अलावा, बैंक ने बताया कि शेट्टी ने पहले अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य की अदालत में भी मिलते-जुलते आरोपों के साथ मुकदमा दायर किया था, जिसे जुलाई 2024 में खारिज कर दिया गया था।
यहां भी दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। पुराने मुकदमे का खारिज होना, नए मुकदमे के हर आरोप का स्वतः निपटारा नहीं करता। नए मामले का परिणाम संबंधित याचिका, उपलब्ध सबूतों और अदालत के फैसलों पर निर्भर करेगा।
इस मामले का विश्लेषण: आम लोगों के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
पहला सवाल — क्या किसी बैंक के खिलाफ इतना बड़ा दावा उसकी वित्तीय स्थिति को तुरंत खतरे में डाल देता है?
जरूरी नहीं। ₹1.44 लाख करोड़ का आंकड़ा शेट्टी की ओर से मांगे गए हर्जाने का है। इसे बैंक की तत्काल देनदारी या निश्चित नुकसान मानना गलत होगा। वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालत में क्या साबित होता है और क्या कोई भुगतान या प्रावधान आवश्यक होता है।
दूसरा सवाल — क्या ₹5,700 करोड़ का समझौता बैंक की गलती साबित करता है?
नहीं। किसी विवाद का समझौते से निपटारा होना और अदालत में किसी पक्ष की गलती साबित होना अलग-अलग बातें हैं। समझौते की शर्तें, कानूनी जिम्मेदारी और अलग मुकदमों के दावों को अलग-अलग देखना होगा।
तीसरा सवाल — बैंकिंग व्यवस्था पर इससे क्या सवाल उठते हैं?
यदि किसी कंपनी के खातों से संदिग्ध लेन-देन हुए हों, चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया हो या बिना उचित अनुमति के दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ हो, तो यह बैंक के KYC, आंतरिक नियंत्रण, AML निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
लेकिन किसी बैंक के कर्मचारियों पर आरोप लगना और पूरे बैंक की कानूनी जिम्मेदारी साबित होना अलग बातें हैं। इसके लिए दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड, अधिकारियों की भूमिका और नियामकीय जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
चौथा सवाल — शेयर बाजार ने क्या प्रतिक्रिया दी?
Reuters के अनुसार, मुकदमे की खबर सामने आने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर मंगलवार को 2.6% गिरे और बुधवार को भी शुरुआती रिपोर्टिंग के समय तक गिरावट दर्ज की गई। बाजार में ऐसी प्रतिक्रिया अक्सर अनिश्चितता के कारण होती है; इसे बैंक के दोषी होने या भविष्य में निश्चित नुकसान का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।
निष्कर्ष
बी.आर. शेट्टी और बैंक ऑफ बड़ौदा के बीच यह विवाद सिर्फ ₹1.44 लाख करोड़ के हर्जाने की मांग तक सीमित नहीं है। इसकी जड़ें NMC Health के वित्तीय पतन, अरबों डॉलर की छिपी देनदारियों के खुलासे, बैंकिंग लेन-देन और अलग-अलग देशों में चल रही कानूनी कार्यवाहियों तक फैली हैं।
फिलहाल तीन बातें स्पष्ट हैं:
- शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य पक्षों के खिलाफ बड़ा हर्जाना मांगा है।
- बैंक का कहना है कि वह मुकदमे का मजबूती से सामना करेगा और शेट्टी से लगभग ₹2,800 करोड़ की वसूली के अपने प्रयास जारी रखेगा।
- शेट्टी की ओर से लगाए गए नए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
इस मामले में असली तस्वीर अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और न्यायिक फैसलों से ही साफ होगी।
