Microsoft के नाम पर आया अलर्ट कितना खतरनाक हो सकता है? इस ठगी ने अमेरिकी बुजुर्गों को बड़ा झटका दिया!
‘आपका कंप्यूटर हैक हो गया है’… फिर Bitcoin ATM तक पहुंचाया, दिल्ली-पंजाब से चला US Seniors को ठगने का खेल……
कल्पना कीजिए, आपके कंप्यूटर की स्क्रीन पर अचानक एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी दिखाई देती है। उसमें लिखा है कि सिस्टम हैक हो चुका है और आपके बैंक खाते की जानकारी खतरे में है। स्क्रीन पर दिए नंबर पर फोन करते ही सामने वाला खुद को Microsoft का कर्मचारी बताता है। वह आपको भरोसा दिलाता है कि वह आपकी मदद कर सकता है।
यही डर और भरोसे का खेल कथित तौर पर अमेरिका के कई बुजुर्गों के साथ खेला गया। फर्क सिर्फ इतना था कि समस्या असली नहीं थी—पूरा खतरा ही एक साजिश का हिस्सा था।
भारत में CBI ने पंजाब और दिल्ली से संचालित बताए जा रहे ऐसे ही एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरोह अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था और Microsoft, वित्तीय संस्थानों तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधि बनकर उनसे पैसे ऐंठता था।
शुरुआत एक फर्जी ‘कंप्यूटर हैक’ अलर्ट से
CBI के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क की गतिविधियां वर्ष 2022 से जुड़ी हुई हैं। बुजुर्ग अमेरिकी नागरिकों को फोन या ईमेल के जरिए बताया जाता था कि उनका कंप्यूटर संक्रमित या हैक हो गया है और बैंक खाते भी खतरे में हैं।
कई मामलों में फर्जी पॉप-अप और Microsoft के नाम से दिखने वाले नकली हेल्पलाइन नंबर इस्तेमाल किए जाते थे। पीड़ित जब उस नंबर पर संपर्क करता, तो ठग खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर बातचीत आगे बढ़ाते।
इसके बाद डर को और बढ़ाया जाता।
पीड़ित को बताया जाता कि उसके पैसे या निजी जानकारी चोरी हो सकती है। कुछ मामलों में उसे यह भी विश्वास दिलाया जाता कि वह किसी गंभीर अपराध की जांच में फंस सकता है। CBI की जांच के अनुसार, इसी दबाव के बीच पीड़ितों को पैसे देने के लिए तैयार कराया जाता था।
सबसे खतरनाक मोड़: Bitcoin ATM
इस कथित ठगी का सबसे अलग हिस्सा था Bitcoin ATM।
पीड़ितों को नकद रकम निकालने और उसे Bitcoin ATM में जमा करने के लिए कहा जाता था। उन्हें बताया जाता था कि यह रकम उनके कंप्यूटर या बैंक खाते को सुरक्षित करने, सॉफ्टवेयर खरीदने अथवा कथित समस्या ठीक करने के लिए जरूरी है।
असल में पैसा कथित ठगों के नियंत्रण वाले Cryptocurrency Wallets तक पहुंच रहा था।
CBI के मुताबिक, ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए घुमाया गया और बाद में आरोपियों से जुड़े खातों तथा भारतीय बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचाया गया।
यानी पूरा मॉडल कुछ ऐसा था:
फर्जी Microsoft अलर्ट → डर पैदा करना → फोन पर भरोसा बनाना → नकद निकालने का दबाव → Bitcoin ATM → Crypto Wallet → रकम को कई स्तरों पर घुमाना → भारत तक पहुंचाना
यही वजह है कि यह सिर्फ एक साधारण कॉल-सेंटर फ्रॉड नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित कथित साइबर-फाइनेंशियल नेटवर्क के रूप में जांच के दायरे में आया।
जांच में सामने आया ₹50 करोड़ से ज्यादा का क्रिप्टो ट्रेल
CBI की ओर से अदालत में रखे गए विवरण के मुताबिक, आरोपी सौरभ राणा से जुड़े Binance अकाउंट में कथित तौर पर 203.30 Bitcoin पहुंचे थे।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि उस समय इनकी कीमत लगभग 6.53 मिलियन डॉलर यानी ₹50 करोड़ से अधिक थी। एजेंसी ने एक अमेरिकी पीड़ित, Joanne Maalouf, से जुड़े क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का कथित लिंक भी अदालत के सामने रखा।
CBI के अनुसार, यह अकाउंट कथित तौर पर राणा के आधार से जुड़ा था और जांच के दौरान दिल्ली से संबंधित IP addresses से इसके इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई।
इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले WhatsApp chats और अन्य डिजिटल सामग्री को भी जांच में महत्वपूर्ण बताया गया है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ये जांच एजेंसी के आरोप और अदालत के सामने रखी गई सामग्री हैं। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय से ही तय होगी।
CBI की कार्रवाई में क्या मिला?
CBI ने जुलाई 2026 में मामला दर्ज किया था। एजेंसी ने Information Technology Act की धारा 66(D) समेत संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की।
अगस्त में सौरभ राणा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली, लुधियाना और मोहाली में की गई तलाशी के दौरान करीब 30 डिजिटल डिवाइस, जिनमें मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल थे, जब्त किए गए।
CBI का कहना है कि इन डिवाइसों, क्रिप्टो वॉलेट्स और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
सौरभ राणा की ओर से जमानत के लिए यह तर्क दिया गया कि कथित अपराध वर्ष 2022 के हैं, जबकि FIR काफी बाद में दर्ज हुई।
लेकिन Rouse Avenue Courts की ACJM ज्योति माहेश्वरी ने 22 सितंबर के आदेश में जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने डिजिटल डिवाइसों की बरामदगी, कथित आपत्तिजनक चैट्स और जांच में सामने आए कथित संचालन ढांचे को गंभीरता से लिया।
अदालत ने यह भी माना कि मामला कई अमेरिकी वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ा है और इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं।
यह ठगी सिर्फ अमेरिका की कहानी नहीं है
इस मामले की सबसे बड़ी सीख यह है कि ठगों को अब पीड़ित के देश में मौजूद होना जरूरी नहीं।
एक देश में बैठकर फर्जी तकनीकी सहायता दी जा सकती है, दूसरे देश के व्यक्ति से पैसा लिया जा सकता है, उसे cryptocurrency में बदला जा सकता है और फिर अलग-अलग wallets तथा accounts के जरिए पैसा दूसरे देश तक पहुंचाया जा सकता है।
अमेरिकी Federal Trade Commission (FTC) भी लंबे समय से ऐसे टेक-सपोर्ट और impersonation scams को लेकर चेतावनी देता रहा है। FTC के मुताबिक, नकली Microsoft या Apple security alerts लोगों को फोन करने के लिए उकसाते हैं और फिर ठग उन्हें पैसे ट्रांसफर करने या cryptocurrency खरीदने के लिए दबाव डालते हैं।
FTC के आंकड़ों के मुताबिक, Bitcoin ATM से जुड़े fraud losses 2020 से 2023 के बीच लगभग दस गुना बढ़े और 2024 की पहली छमाही में ही ऐसे नुकसान $65 million से ऊपर पहुंच गए थे। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर इसका असर विशेष रूप से गंभीर रहा।
सबसे जरूरी चेतावनी
इस पूरे मामले में एक बात आम लोगों को याद रखनी चाहिए—
Microsoft, बैंक या कोई सरकारी एजेंसी अगर अचानक फोन करके कहे कि आपका पैसा बचाने के लिए उसे Bitcoin ATM में डालिए, तो यह खतरे की बहुत बड़ी घंटी है।
किसी भी अनजान कॉल पर:
- पैसा निकालकर किसी मशीन में जमा न करें।
- कोई Crypto/Bitcoin payment न करें।
- कंप्यूटर पर दिख रहे अनजान नंबर पर फोन न करें।
- Remote-access software किसी अजनबी को न दें।
- कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से नंबर लेकर खुद संपर्क करें।
- डर लगने पर तुरंत परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
क्योंकि इस तरह के फ्रॉड में ठग आपकी तकनीकी कमजोरी से ज्यादा आपकी घबराहट का इस्तेमाल करते हैं।
महत्वपूर्ण: आरोपियों पर लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं; उन्हें दोषी ठहराया जाना अंतिम अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।
