Stock Market में मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर बनाया जाल, फर्जी ऐप से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ।
₹7.29 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा: फर्जी स्टॉक ट्रेनिंग से निवेश ऐप तक, ऐसे फंसाए गए लोग……
शेयर बाजार और IPO में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को ठगने वाले एक कथित साइबर गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश STF ने बड़ी कार्रवाई की है। STF ने इस मामले में 37 वर्षीय विवेक कुमार सिंह को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था जो सोशल मीडिया विज्ञापनों, WhatsApp ग्रुप और एक संदिग्ध निवेश ऐप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
STF की जांच के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े मामले में कथित तौर पर करीब ₹7.29 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई है। जांच में National Cyber Crime Reporting Portal पर इस नेटवर्क से जुड़े 3,087 ऑनलाइन शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, शिकायतों की संख्या को सीधे तौर पर ठगी की पुष्टि या प्रत्येक शिकायत को इसी आरोपी से जोड़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; मामले की जांच अभी जारी है।
Instagram विज्ञापन से शुरू होता था पूरा खेल
STF के अनुसार, कथित गिरोह ने Instagram पर Stock Market Analysis और Trading Training के नाम पर विज्ञापन चलाए। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को बाद में WhatsApp ग्रुप में जोड़ा जाता था।
ऐसे ही एक ग्रुप का नाम “VIP9-6 ACI Exclusive Guidance Group” बताया गया है। यहां शेयर बाजार और IPO में निवेश से जुड़ी जानकारी देने का दावा किया जाता था। लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए कथित तौर पर फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाए जाते थे।
यही इस तरह के निवेश घोटालों का महत्वपूर्ण हिस्सा है—पहले पीड़ित को कम रकम से भरोसा दिलाया जाता है और फिर बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है।
असली मुनाफा नहीं, ऐप में दिखता था नकली फायदा
STF के मुताबिक, WhatsApp ग्रुप के सदस्यों को ACI Century App डाउनलोड करने के लिए लिंक दिया जाता था। कथित तौर पर इसी ऐप पर निवेश खाते बनाए जाते थे और बैंक खातों में पैसा जमा कराया जाता था।
सबसे अहम बात यह थी कि ऐप के डैशबोर्ड पर जमा रकम और कथित मुनाफा दिखाई देता था। लेकिन जांच एजेंसी के अनुसार, स्क्रीन पर दिख रही यह रकम और लाभ वास्तविक नहीं थे।
यानी पीड़ित को मोबाइल स्क्रीन पर यह महसूस कराया जाता था कि उसका निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे वह और अधिक पैसा लगाने के लिए तैयार हो सकता था। STF के अनुसार, इसी प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये जमा कराए गए।
पैसा कई खातों में घुमाकर USDT में बदला गया
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि निवेश के नाम पर प्राप्त रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजा गया। इनमें कथित रूप से फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए खाते भी शामिल थे।
इसके बाद STF के अनुसार रकम को कई स्तरों से घुमाकर USDT cryptocurrency में बदला गया और कथित तौर पर दुबई में मौजूद नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंचाया गया। यह हिस्सा जांच के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि साइबर ठगी में केवल फर्जी ऐप या सोशल मीडिया अकाउंट ही नहीं, बल्कि बैंकिंग चैनल और क्रिप्टो ट्रांसफर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
देहरादून में कहां से पकड़ा गया आरोपी?
STF के अनुसार, विवेक कुमार सिंह को 19 सितंबर की शाम करीब 7:20 बजे देहरादून के राजपुर क्षेत्र स्थित सिद्धार्थ रीगल से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, दो SIM कार्ड, दो राउटर और ₹15,500 नकद बरामद किए जाने की बात कही गई है।
आरोपी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech बताया गया है। उसके खिलाफ लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में Case No. 126/2025 दर्ज है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ Information Technology Act की धारा 66D लगाई गई है। धारा 66D इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धोखाधड़ी करने से संबंधित है।
पहले भी कई आरोपी गिरफ्तार
STF ने बताया कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य आरोपियों को भी पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक अनुराग अरविंद श्रीवास्तव को 31 जुलाई को नागपुर, विनोद कुमार राठौर को 22 अगस्त को झाबुआ और सुधीर गंगाधर दास तथा शेख नदीम सलीम को 23 अगस्त को ठाणे के पास से गिरफ्तार किया गया था।
मामले की शुरुआत अपूर्वा राय की शिकायत से हुई थी। अब जांच एजेंसी नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, बैंक खातों और कथित रकम के पूरे रास्ते का पता लगाने की कोशिश कर रही है। आरोपी को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए लखनऊ लाने हेतु Transit Remand की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक
इस मामले का तरीका समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें ठगी की शुरुआत सीधे पैसे मांगने से नहीं होती। पहले Instagram Advertisement → WhatsApp Group → Fake Training → Fake Profit Screenshot → Investment App → Bank Transfer जैसी पूरी प्रक्रिया तैयार की जाती है।
यही वजह है कि केवल WhatsApp ग्रुप या ऐप पर दिखाई दे रहा मुनाफा किसी निवेश के वास्तविक होने का प्रमाण नहीं है।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK या संदिग्ध निवेश ऐप डाउनलोड न करें। किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करें और केवल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले मुनाफे के आधार पर अतिरिक्त रकम जमा न करें।
अगर साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करना और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करना महत्वपूर्ण है। शुरुआती समय में शिकायत करने से बैंकिंग लेनदेन को रोकने या रकम की ट्रेसिंग की संभावना बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
यह मामला अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया में है। ₹7.29 करोड़ की ठगी, नेटवर्क की भूमिका, आरोपियों के बीच संबंध और रकम के अंतिम लाभार्थियों से जुड़े निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे स्पष्ट होंगे। उपलब्ध रिपोर्टों में STF के हवाले से आरोपों और जांच के निष्कर्षों की जानकारी दी गई है; इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
