सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ डिजिटल सुरक्षा भी मजबूत होगी, 2,000 से ज्यादा साइबर वॉरियर्स संभालेंगे मोर्चा।
सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी से बचाएंगे 2,000 से ज्यादा ‘साइबर वॉरियर्स’
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है। भीड़, यात्रा और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के साथ अब साइबर सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। मध्य प्रदेश स्टेट साइबर सेल ने श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए कॉलेज छात्रों को ‘साइबर वॉरियर्स’ के रूप में तैयार करने की योजना शुरू की है।
ताजा जानकारी के मुताबिक, इंदौर और उज्जैन के 33 कॉलेजों के 1,884 छात्रों को इस अभियान में शामिल किया जा चुका है। इनमें इंदौर के 20 कॉलेजों से 1,113 छात्र और उज्जैन के 13 कॉलेजों से 771 छात्र हैं। साइबर सेल का लक्ष्य इस नेटवर्क को बढ़ाकर 2,000 से अधिक साइबर वॉरियर्स तैयार करना है।
श्रद्धालुओं को किन ठगी से बचाएंगे?
सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों लोग होटल, धर्मशाला, टैक्सी, यात्रा और दूसरी सेवाओं की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। इसी बढ़ती डिजिटल निर्भरता को साइबर अपराधी ठगी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
साइबर सेल की ट्रेनिंग में छात्रों को खास तौर पर इन तरीकों की पहचान करना सिखाया जाएगा—
- फर्जी होटल और धर्मशाला बुकिंग वेबसाइट
- नकली टैक्सी या टूर बुकिंग
- संदिग्ध लिंक और वेबसाइट
- QR Code Scam
- फर्जी ऑनलाइन पेमेंट
- सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी
- मोबाइल और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग के तरीके
इसके साथ छात्रों को सुरक्षित डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया सिक्योरिटी और साइबर फ्रॉड होने के बाद तुरंत उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी दी जाएगी।
‘साइबर वॉरियर’ पुलिस नहीं, बल्कि पहला मददगार नेटवर्क होगा
इस योजना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये छात्र खुद पुलिस अधिकारी नहीं होंगे। इन्हें साइबर ठगी के शिकार लोगों की प्राथमिक सहायता और सही शिकायत प्रक्रिया तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
सिंहस्थ के दौरान प्रशिक्षित छात्रों को जरूरत के मुताबिक साइबर सहायता और जागरूकता से जुड़े काम में लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, विशेष प्रशिक्षण करीब पांच दिन का होगा। इसमें छात्रों को पीड़ितों से बातचीत करने, उनकी समस्या समझने और सरकारी शिकायत व्यवस्था तक पहुंचाने का तरीका सिखाया जाएगा।
उन्हें यह भी बताया जाएगा कि पीड़ित के अपने मोबाइल फोन से जरूरी ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज कराई जाए। उदाहरण के तौर पर, खोए या चोरी हुए मोबाइल की जानकारी Central Equipment Identity Register (CEIR) व्यवस्था के जरिए दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी।
यह प्रयोग पहले भी किया जा चुका है
यह पूरी तरह नया प्रयोग नहीं है। साइबर सेल ने उज्जैन में महाशिवरात्रि के दौरान कॉलेज छात्रों को प्रशिक्षण देकर एक समर्पित साइबर डेस्क पर काम कराया था। वहां छात्रों ने साइबर समस्या लेकर आने वाले लोगों के लिए शुरुआती स्तर पर मदद उपलब्ध कराई। इसी अनुभव को सिंहस्थ 2028 के लिए बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी है।
अधिकारियों के मुताबिक, छात्रों को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। सिंहस्थ के दौरान ड्यूटी करने वाले छात्रों के लिए मानदेय देने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
इतनी बड़ी तैयारी की जरूरत क्यों?
सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक विशाल मोबिलिटी और डिजिटल इकोसिस्टम भी होगा। श्रद्धालु यात्रा टिकट, होटल, धर्मशाला, टैक्सी, भोजन, दर्शन और दूसरी सेवाओं के लिए मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर रहेंगे।
यही वह जगह है जहां ठगी का खतरा बढ़ सकता है।
मसलन, कोई व्यक्ति इंटरनेट पर ‘उज्जैन होटल बुकिंग’ खोजता है और उसे असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी साइट मिल जाती है। वह एडवांस पेमेंट कर देता है और बाद में पता चलता है कि बुकिंग अस्तित्व में ही नहीं थी। इसी तरह फर्जी QR कोड, नकली भुगतान लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।
इसलिए साइबर वॉरियर्स मॉडल का उद्देश्य केवल घटना के बाद शिकायत दर्ज कराना नहीं, बल्कि लोगों को ठगी के संकेत पहले पहचानने में मदद करना भी है।
पहले से बढ़ाई जा रही है डिजिटल तैयारी
सिंहस्थ की तैयारियों में डिजिटल व्यवस्था का दायरा पहले से बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट में मध्य प्रदेश साइबर पुलिस ने सिंहस्थ के लिए 3,000 से ज्यादा साइबर वॉरियर्स को प्रशिक्षित करने की योजना की जानकारी दी थी। उस समय विभाग ने प्रयागराज कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से सीख लेने की बात कही थी।
अब सितंबर 2026 की ताजा रिपोर्टों में इंदौर और उज्जैन के 1,884 छात्रों के नामांकन और लक्ष्य को 2,000 से ज्यादा तक ले जाने की जानकारी सामने आई है। यानी योजना समय के साथ अधिक स्पष्ट और चरणबद्ध होती दिखाई दे रही है।
इसके अलावा सिंहस्थ की तैयारियों में डिजिटल पुलिसिंग और प्रशासनिक तकनीक पर भी काम हो रहा है। पुलिस ड्यूटी प्रबंधन के लिए डिजिटल पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की गई हैं।
श्रद्धालुओं के लिए सबसे जरूरी सावधानी
सिंहस्थ में जाने वाले लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि किसी भी ऑनलाइन सेवा को बुक करने से पहले उसकी वेबसाइट, मोबाइल नंबर और भुगतान विवरण की जांच करें।
किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करना, जल्दी भुगतान करने का दबाव स्वीकार करना या QR कोड को बिना समझे स्कैन करना जोखिम बढ़ा सकता है।
सरकारी National Cyber Crime Reporting Portal पर नागरिक साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकते हैं और साइबर वॉलंटियर कार्यक्रम के लिए भी पंजीकरण की व्यवस्था उपलब्ध है।
निष्कर्ष
सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा अब केवल पुलिस, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं का डिजिटल पैसा, मोबाइल, व्यक्तिगत जानकारी और ऑनलाइन बुकिंग भी सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
इंदौर और उज्जैन के कॉलेज छात्रों को ‘साइबर वॉरियर्स’ के रूप में तैयार करने की पहल इसी बदलती चुनौती का जवाब है। अगर यह नेटवर्क प्रभावी तरीके से जमीन पर काम करता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि श्रद्धालु साइबर ठगी का शिकार होने के बाद अकेले न पड़ें और उन्हें तुरंत सही सहायता व शिकायत व्यवस्था तक पहुंच मिल सके।
