Credit card fraud: क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया, OTP लिया और देखते ही देखते खाते से 1.35 लाख रुपये गायब कर दिए।
क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा, OTP लेकर खाते से उड़ाए 1.35 लाख; आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार
अंबाला: साइबर ठगी के मामलों में ठग अब लोगों को डराने के बजाय बैंकिंग सुविधाओं का लालच देकर भी निशाना बना रहे हैं। अंबाला में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1,35,565 रुपये की ठगी कर ली गई। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को दिल्ली के नजफगढ़ से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान जय किशन, निवासी नजफगढ़, नई दिल्ली के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
बैंक कर्मचारी बनकर किया संपर्क
मामला अंबाला के मोहड़ी गांव से जुड़ा है। शिकायतकर्ता दलजीत ने पुलिस को बताया कि 26 अगस्त को एक अज्ञात व्यक्ति ने उससे संपर्क किया। उसने खुद को बैंक कर्मचारी बताते हुए क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने की बात कही।
बातचीत के दौरान आरोपी ने शिकायतकर्ता को अपनी बातों में उलझाया और उससे OTP (One-Time Password) हासिल कर लिया। इसके बाद कथित तौर पर बैंक खाते से जुड़ी जानकारी में बदलाव किया गया और पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलकर खाते से 1,35,565 रुपये निकाल लिए गए।
शिकायत के आधार पर 27 अगस्त को मामला दर्ज किया गया और साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की।
डिजिटल साक्ष्यों से दिल्ली तक पहुंची पुलिस
जांच अधिकारी संदीप कुमार के अनुसार पुलिस ने मामले की जांच में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल किया। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और 8 सितंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी मूल रूप से समस्तीपुर, बिहार का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रह रहा था।
यह मामला इस बात को भी सामने लाता है कि साइबर ठगी में अपराधी केवल लिंक भेजकर या फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर ही पैसे नहीं निकालते। कई बार वे पहले खुद को बैंक अधिकारी या कर्मचारी बताकर विश्वास कायम करते हैं और फिर OTP या दूसरी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
असली खतरा OTP मांगने से पहले शुरू हो जाता है
इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठगी का आधार केवल OTP नहीं था। आरोपी ने पहले बैंक कर्मचारी होने का भरोसा पैदा किया और फिर क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने जैसी सामान्य बैंकिंग सुविधा का लालच दिया।
यही साइबर ठगों की एक आम रणनीति है—पहले व्यक्ति को यह विश्वास दिलाना कि सामने वाला बैंक से जुड़ा है, फिर प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर संवेदनशील जानकारी हासिल करना।
OTP, PIN, CVV, UPI PIN और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी जानकारी किसी बैंक कर्मचारी को बताने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति फोन पर ऐसी जानकारी मांगता है तो उसे बातचीत तुरंत बंद कर देनी चाहिए।
इस मामले में पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलने के बाद रकम निकाली गई। इसलिए मोबाइल नंबर, ईमेल और बैंकिंग अलर्ट में अचानक बदलाव दिखाई देना भी एक महत्वपूर्ण साइबर फ्रॉड संकेत हो सकता है।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानी
अगर कोई व्यक्ति फोन करके कहे कि आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाई जा सकती है, तो फोन पर मिलने वाले निर्देशों पर तुरंत भरोसा न करें। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या कार्ड के पीछे दिए गए आधिकारिक नंबर से खुद संपर्क करके जानकारी की पुष्टि करें।
किसी अनजान व्यक्ति को OTP या कार्ड की गोपनीय जानकारी न दें। अगर खाते से अनधिकृत रकम निकल जाए तो समय बर्बाद किए बिना बैंक को सूचित करें और 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
अंबाला का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध में तकनीक के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसलिए डिजिटल सुरक्षा का पहला नियम यही है—बैंकिंग सुविधा का लालच देने वाला कोई भी अनजान कॉलर आपकी गोपनीय जानकारी का हकदार नहीं है।
