डेटिंग ऐप पर भरोसा पड़ा भारी, कुछ देर में मोबाइल और पैसे दोनों गायब!!!!
डेटिंग ऐप पर दोस्ती, फिर मोबाइल चोरी: 67 साल के बुजुर्ग से ₹1.30 लाख की ठगी….
दिल्ली में डेटिंग ऐप के जरिए साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें 67 साल के एक व्यक्ति को पहले फर्जी प्रोफाइल के जरिए भरोसे में लिया गया और फिर मुलाकात के दौरान उनका मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया। इसके बाद कथित तौर पर उनके बैंक खातों से करीब ₹1.30 लाख निकाल लिए गए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिलाओं में से एक ने फर्जी पहचान के नाम से डेटिंग ऐप पर प्रोफाइल बनाया था। इसी प्रोफाइल के जरिए 67 वर्षीय व्यक्ति से बातचीत शुरू हुई। बाद में दोनों के बीच मैसेजिंग ऐप पर संपर्क बढ़ा और मुलाकात तय हुई।
पुलिस का आरोप है कि इसके बाद दूसरी महिला ने उस व्यक्ति से मुलाकात की और खुद को उसी महिला के रूप में पेश किया, जिससे पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत हुई थी। मुलाकात दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी इलाके में हुई। इसी दौरान कथित तौर पर पीड़ित का मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया।
मोबाइल हाथ लगने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसमें मौजूद बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल किया और UPI के जरिए बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर किए। कुल नुकसान लगभग ₹1.30 लाख बताया गया है।
पुलिस ने आरोपियों तक कैसे पहुंच बनाई?
मामले की जांच दक्षिण-पश्चिम दिल्ली की साइबर पुलिस ने की। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने CCTV फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी निगरानी जैसी जानकारियों को जोड़कर संदिग्धों की पहचान की। पुलिस ने मामले में ज्योत्सना (26) और मानशी (21) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की जांच अभी जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का किसी अन्य समान मामले से संबंध है या नहीं।
इस मामले में सबसे बड़ा खतरा क्या है?
यह मामला केवल डेटिंग ऐप फ्रॉड नहीं है। इसमें ठगी का तरीका कई चरणों में दिखाई देता है—
फर्जी प्रोफाइल → ऑनलाइन भरोसा → आमने-सामने मुलाकात → मोबाइल चोरी → बैंकिंग एक्सेस → पैसे ट्रांसफर
यानी अपराधियों ने सिर्फ भावनात्मक भरोसे का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि चोरी हुए मोबाइल को आर्थिक ठगी के अगले चरण के लिए इस्तेमाल किया। यही इस घटना को सामान्य ऑनलाइन डेटिंग धोखाधड़ी से ज्यादा गंभीर बनाता है।
आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का साधन नहीं है। उसमें बैंकिंग ऐप, UPI, ईमेल, OTP संदेश, सेव किए गए पासवर्ड और निजी जानकारी मौजूद हो सकती है। इसलिए फोन चोरी होना सीधे तौर पर वित्तीय सुरक्षा का जोखिम भी बन सकता है।
बुजुर्गों के लिए खास चेतावनी
इस घटना से यह जरूरी सबक निकलता है कि ऑनलाइन पहचान को वास्तविक पहचान मान लेना खतरनाक हो सकता है। डेटिंग ऐप पर सामने वाले व्यक्ति की तस्वीर, नाम या प्रोफाइल अपने आप में उसकी असली पहचान की गारंटी नहीं है।
खासकर पहली मुलाकात में:
- सुनसान जगह पर मिलने से बचें।
- अपना मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- बैंकिंग ऐप और UPI की सुरक्षा मजबूत रखें।
- फोन में स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सुरक्षा सक्रिय रखें।
- बैंकिंग PIN, UPI PIN और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- किसी नए ऑनलाइन संपर्क के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- संदिग्ध व्यवहार होने पर बातचीत और प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
अगर बैंक खाते से अनधिकृत पैसा निकल गया है, तो समय बर्बाद न करें। भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल सूचना 1930 हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली के लिए जारी सरकारी दिशा-निर्देशों में भी 1930 पर शिकायत करते समय बैंक/वॉलेट की जानकारी, ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसे विवरण तैयार रखने की सलाह दी गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System के जरिए 24.65 लाख से ज्यादा शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक की रकम बचाई जा चुकी थी। इससे साफ है कि ठगी की सूचना जितनी जल्दी दी जाए, पैसे को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली का यह मामला बताता है कि ऑनलाइन दोस्ती से शुरू होने वाला अपराध कुछ ही मिनटों में डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड में बदल सकता है। डेटिंग ऐप पर बातचीत करते समय सावधानी जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपने मोबाइल और बैंकिंग एक्सेस को सुरक्षित रखना।
सबसे अहम बात—अगर मोबाइल चोरी हो जाए और उसी समय बैंकिंग फ्रॉड का शक हो, तो पहले 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करें और अपने बैंक से खाते/UPI की सुरक्षा के लिए संपर्क करें।
