Fake trading app ने वैज्ञानिक को बनाया शिकार, डूबे 1.3 करोड़ रुपये!!!!
₹1.3 करोड़ का ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाला: रिटायर्ड वैज्ञानिक भी साइबर जाल में फंसे..
महाराष्ट्र में एक चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड सामने आया है। देश के प्रतिष्ठित परमाणु अनुसंधान संस्थान, Bhabha Atomic Research Centre (BARC) के एक रिटायर्ड वैज्ञानिक से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 1.3 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी अब केवल आम लोगों को ही नहीं, बल्कि शिक्षित और अनुभवी लोगों को भी निशाना बना रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
पीड़ित को एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ बताने वाले लोग निवेश के सुझाव दे रहे थे। ग्रुप में रोजाना बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट और सफल निवेशकों की कहानियां साझा की जाती थीं, जिससे यह एक असली निवेश मंच जैसा दिखाई देने लगा।
इसके बाद वैज्ञानिक को एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और ऐप के जरिए निवेश करने के लिए कहा गया। उन्होंने अलग-अलग खातों में पैसे जमा किए और ऐप में उनका निवेश बढ़ता हुआ दिखाई देने लगा। कुछ समय बाद ऐप पर उनके खाते में करोड़ों रुपये का वर्चुअल मुनाफा भी दिखने लगा।
जब पैसे निकालने की कोशिश की, तब खुला राज
जब वैज्ञानिक ने अपना पैसा निकालना चाहा, तो उन्हें बताया गया कि उनका अकाउंट “ब्लॉक” हो गया है। ठगों ने कहा कि अकाउंट दोबारा सक्रिय करने के लिए उन्हें एक आईपीओ (IPO) में 82 लाख रुपये और निवेश करने होंगे। यहीं से उन्हें शक हुआ कि वे किसी बड़े धोखाधड़ी के शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
यह तरीका नया नहीं है
हाल के महीनों में मुंबई और महाराष्ट्र में ऐसे कई मामले सामने आए हैं:
- मुंबई के एक 67 वर्षीय कारोबारी से फर्जी निवेश समूहों के जरिए 82.5 लाख रुपये की ठगी की गई।
- दक्षिण मुंबई के एक व्यवसायी ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप में निवेश कर करीब 11 करोड़ रुपये गंवा दिए।
- पुणे के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से भी ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 1.15 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
इन मामलों में एक समान पैटर्न दिखता है—WhatsApp या Telegram ग्रुप, फर्जी निवेश सलाहकार, नकली ट्रेडिंग ऐप और झूठे मुनाफे का लालच।
साइबर अपराधी ऐसा क्यों करते हैं?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग पहले लोगों का विश्वास जीतते हैं। शुरुआती दिनों में ऐप पर नकली मुनाफा दिखाया जाता है ताकि निवेशक ज्यादा पैसे लगाने के लिए प्रेरित हो जाए। जब व्यक्ति बड़ी रकम जमा कर देता है, तब निकासी रोक दी जाती है और उससे टैक्स, पेनल्टी, अकाउंट अनलॉक फीस या अतिरिक्त निवेश के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।
खुद को कैसे बचाएं?
- WhatsApp या Telegram पर मिले निवेश सुझावों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
- केवल उन्हीं प्लेटफॉर्म पर निवेश करें जो भारत के Securities and Exchange Board of India (SEBI) से पंजीकृत हों।
- यदि कोई व्यक्ति “गारंटीड रिटर्न” या “कुछ दिनों में पैसा दोगुना” होने का दावा करे, तो सावधान हो जाएं।
- किसी ऐप में दिख रहे मुनाफे को असली पैसा न मानें, जब तक वह आपके बैंक खाते में न आ जाए।
- धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें।
सीख क्या है?
यह घटना बताती है कि साइबर अपराधियों के जाल में फंसने के लिए तकनीकी जानकारी की कमी जरूरी नहीं है। लालच, भरोसा और जल्दी मुनाफा कमाने की इच्छा का फायदा उठाकर ठग किसी को भी निशाना बना सकते हैं। निवेश करने से पहले हर प्लेटफॉर्म, सलाहकार और ऐप की जांच करना आज की सबसे बड़ी डिजिटल सुरक्षा है।
