सावधान: ग्रामीणों के बैंक खातों से हो रहा है cyber fraud !!!!!
ग्रामीणों के बैंक खातों का साइबर ठगी में इस्तेमाल, चार गिरफ्तार…
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो गांव के गरीब और अनपढ़ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी का पैसा इधर-उधर भेजने के लिए कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने विभिन्न राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की रकम में से एक करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन इन खातों के जरिए किया।
कैसे काम करता था गिरोह?
पुलिस के मुताबिक, आरोपी गांवों में जाकर लोगों को आसान लोन दिलाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने या कुछ हजार रुपये देने का लालच देते थे। इसके बाद वे ग्रामीणों से बैंक खाता खुलवाते या उनके पुराने खातों की जानकारी हासिल कर लेते थे।
गिरोह के सदस्य खाते से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे:
- एटीएम कार्ड
- पासबुक
- चेकबुक
- पिन नंबर और ओटीपी की जानकारी
अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद यही खाते साइबर अपराधियों को किराये पर दे दिए जाते थे। इन खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” (Mule Account) कहा जाता है।
‘म्यूल अकाउंट’ क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल अपराधी चोरी या ठगी के पैसों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं। इससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है क्योंकि बैंक रिकॉर्ड में पैसा किसी आम व्यक्ति के खाते में जाता दिखाई देता है।
जांच में क्या मिला?
पुलिस जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय साइबर ठगों से जुड़ा हुआ था। अधिकारियों को संदेह है कि इस गिरोह ने सैकड़ों ग्रामीणों के खातों का इस्तेमाल किया हो सकता है। पुलिस अब बैंक लेन-देन, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।
देशभर में बढ़ रहा है ‘बैंक अकाउंट रेंट’ रैकेट….
हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां अपराधी लोगों के बैंक खाते किराये पर लेकर साइबर ठगी का पैसा ट्रांसफर कर रहे थे। कई मामलों में विदेशी साइबर गिरोहों के साथ भी इनके संबंध पाए गए हैं।
आम लोगों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने लोगों को चेतावनी दी है कि:
- किसी को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या पिन न दें।
- पैसे कमाने या लोन दिलाने के नाम पर बैंक खाता किराये पर देने की गलती न करें।
- अगर कोई व्यक्ति आपका बैंक खाता इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दे, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
- साइबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन नंबर या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज की जा सकती है।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब सीधे लोगों को ठगने के साथ-साथ गरीब और अनजान लोगों के बैंक खातों का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता किसी और को देना आपको भी कानूनी मुश्किलों में डाल सकता है, क्योंकि ठगी का पैसा आपके खाते से गुजरने पर जांच एजेंसियां सबसे पहले आप तक पहुंचती हैं।
