Bihar tender scam: IAS अधिकारी समेत 7 लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप…
बिहार टेंडर घोटाला: IAS अधिकारी संजीव हंस समेत 7 लोगों पर चार्जशीट, करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप….
बिहार में एक बड़े सरकारी टेंडर घोटाले ने फिर से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार पुलिस की विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस और छह अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में लगभग 4,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी ठेकों को नियमों के बजाय प्रभाव, रिश्वत और मिलीभगत के जरिए कुछ खास कंपनियों को दिलाया गया।
कौन हैं आरोपी?
इस मामले में जिन सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें शामिल हैं:
- IAS अधिकारी संजीव हंस
- ठेकेदार रिशु श्री
- पवन कुमार
- संतोष कुमार
- पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास
- वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी
- बुडको के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह
जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से कई आरोपी फिलहाल जेल में हैं, जबकि संजीव हंस और पवन कुमार फरार बताए जा रहे हैं।
घोटाला क्या है?
SVU का आरोप है कि सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करके कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई परियोजनाओं की लागत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया ताकि अधिक कमीशन और रिश्वत ली जा सके।
उदाहरण के तौर पर, सुपौल के कोसी बैराज से जुड़ी एक परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 69 करोड़ रुपये से बढ़ाकर करीब 98 करोड़ रुपये कर दी गई थी। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस बढ़ी हुई लागत का फायदा भ्रष्ट नेटवर्क को पहुंचाया गया।
रिश्वत और कमीशन का खेल
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी ठेके दिलाने के बदले 7% से 10% तक कमीशन लिया जाता था। इस पैसे का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों तक पहुंचता था।
छापों में क्या मिला?
SVU और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, संपत्ति के दस्तावेज और कीमती सामान बरामद होने का दावा किया गया है।
- मुमुक्षु चौधरी से जुड़े ठिकानों से लगभग 2 करोड़ रुपये नकद।
- तारिणी दास से जुड़े परिसरों से लगभग 8.5 करोड़ रुपये नकद।
- रिशु श्री के ठिकानों से 53.5 लाख रुपये नकद, लगभग 2.13 करोड़ रुपये के आभूषण और 61 जमीनों के दस्तावेज, जिनकी सर्किल रेट के हिसाब से कीमत करीब 58.5 करोड़ रुपये बताई गई है।
संजीव हंस पहले भी विवादों में रहे
संजीव हंस पर इससे पहले भी कथित भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी ठेकों में अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उनकी वित्तीय गतिविधियों की जांच की थी और करोड़ों रुपये की संदिग्ध संपत्तियों तथा लेन-देन की जानकारी सामने आने का दावा किया था।
अब आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला विशेष सतर्कता अदालत में चलेगा। अदालत आरोपों और सबूतों की जांच करेगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के तहत कड़ी सजा हो सकती है। वहीं, जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला केवल एक टेंडर घोटाले का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जिसमें सरकारी परियोजनाओं का पैसा जनता के विकास के बजाय भ्रष्टाचार के जाल में फंस जाता है। बिहार पहले भी कई बड़े घोटालों का गवाह रहा है, और यह मामला एक बार फिर सरकारी खरीद और टेंडर प्रणाली में पारदर्शिता की जरूरत को सामने लाता है।
