सावधान!!! टिंडर-हिंज वाली दोस्ती पड़ सकती है भारी, शबनम साजिद के ‘हनीट्रैप’ रैकेट का खौफनाक सच।
हनी ट्रैप रैकेट का खुलासा — कानून की आड़ में लुट का खेल
दिल्ली में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ Shabnam Sajid नाम की महिला पर हनी ट्रैप के जरिए लोगों को फंसाकर उनसे पैसे वसूलने का आरोप लगा है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि एक संगठित रैकेट के रूप में काम कर रहा था।
1.झूठे मुकदमों और जबरन वसूली (Extortion) रैकेट के मुख्य बिंदु:
- मुख्य आरोपी: इस गिरोह की मुख्य आरोपी शबनम साजिद (44 वर्ष) है, जो दिल्ली के दरियागंज की निवासी है। सोशल मीडिया पर वह अक्सर ‘सिदरा मंसूर’ के नाम से सक्रिय रहती थी।
2.कोर्ट क्लर्क (यशदेव सिंह चौहान) की भूमिका
इस गिरोह में कड़कड़डूमा कोर्ट के क्लर्क यशदेव सिंह चौहान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और संदिग्ध थी:
- अनुभव और प्रभाव: वह पिछले 12 वर्षों से कोर्ट में क्लर्क के रूप में काम कर रहा था, जिससे उसे कानूनी प्रक्रियाओं की गहरी समझ थी।
- नेगोशिएटर (दलाल) की भूमिका: वह इस रैकेट में एक ‘दलाल’ या ‘नेगोशिएटर’ के रूप में कार्य करता था।
- पैसे की वसूली: जब शबनम किसी व्यक्ति के खिलाफ झूठा केस दर्ज करा देती थी, तब यशदेव बीच में आकर शिकायत वापस लेने के बदले पीड़ितों से पैसे ऐंठने (extract money) का काम करता था।
- साजिश का हिस्सा: वह शबनम के साथ मिलकर इस संगठित अपराध को अंजाम देने में पूरी तरह शामिल था, जहाँ वे पुरुषों को हनी ट्रैप में फंसाकर उनसे भारी रकम की मांग करते थे।
3.अपराध का तरीका (Modus Operandi):
जाल बिछाने के लिए इस्तेमाल किए गए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
यह गिरोह पुरुषों को अपने जाल में फंसाने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित सोशल मीडिया और डेटिंग एप्स का उपयोग करता था:
- टिंडर (Tinder)
- हिंज (Hinge)
- इंस्टाग्राम (Instagram)
वह इन एप्स के जरिए पहले दोस्ती करती थी और फिर उन्हें वह उन्हें मिलने के बहाने होटल बुलाती थी और फिर जानबूझकर विवाद पैदा करके उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप लगा देती थी।
- वह नोएडा या महरौली जैसे विभिन्न क्षेत्रों में केस दर्ज कराने की कोशिश करती थी, लेकिन पुलिस द्वारा मेडिकल टेस्ट के लिए कहे जाने पर मना कर देती थी।
- इसके बाद, उसका सहयोगी यशदेव शिकायत वापस लेने के बदले में भारी रकम की मांग करता था।
4.पुलिस द्वारा मेडिकल टेस्ट से इनकार का खुलासा
शबनम साजिद की कार्यप्रणाली यह थी कि वह नोएडा या महरौली जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज कराने की कोशिश करती थी। हालाँकि, जब पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत उससे मेडिकल जांच (Medical Test) करवाने के लिए कहती थी, तो वह हमेशा इसके लिए साफ इनकार कर देती थी। पुलिस द्वारा प्रोटोकॉल का पालन करने और उसके बार-बार मना करने से उसके दावों की सच्चाई पर संदेह पैदा हुआ, जिससे अंततः उसके झूठ का पर्दाफाश हुआ।
5.सुप्रीम कोर्ट द्वारा झूठी एफआईआर को रद्द (Quash) करना
- रिटायर्ड आर्मी कैप्टन राकेश वालिया के खिलाफ शबनम साजिद ने 2021 में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। लगभग चार साल तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस एफआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने यह स्वीकार किया कि शबनम कानूनी खामियों (legal loopholes) का दुरुपयोग कर रही थी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कैप्टन वालिया के जीवन के कीमती चार साल बर्बाद हो गए। अंततः, क्राइम ब्रांच के इंटर-स्टेट सेल ने इस संगठित हनी ट्रैपिंग और जबरन वसूली (extortion) रैकेट का भंडाफोड़ किया।
- दर्ज किए गए मामले: शबनम ने अलग-अलग लोगों के खिलाफ 9 से ज्यादा झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज कराई थीं। इनमें से 3 बलात्कार (Rape) के आरोप थे और 6 छेड़छाड़ (Molestation) व डराने-धमकाने से संबंधित थे।
गिरफ्तारी और कार्रवाई: क्राइम ब्रांच के इंटर-स्टेट सेल ने इस संगठित हनी ट्रैपिंग और जबरन वसूली के रैकेट का पर्दाफाश किया और शबनम साजिद को गिरफ्तार कर लिया है।
6.झूठी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कानूनी दंड
दिए गए स्रोतों में वर्तमान कानूनों के तहत विशिष्ट दंड या धाराओं का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। हालांकि, स्रोतों में इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसी महिलाओं के लिए दोहरी या तिगुनी सजा (double or triple punishment) होनी चाहिए जो सुरक्षा के लिए बने कानूनों का उपयोग जबरन वसूली के लिए करती हैं।
(स्रोतों से बाहर की जानकारी: सामान्यतः भारतीय कानून (BNS/IPC) के तहत झूठी सूचना देने या किसी को फंसाने के लिए धारा 182 या 211 जैसी धाराओं के तहत जेल और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन आपको इसकी पुष्टि कानूनी विशेषज्ञों से करनी चाहिए।)
7.महिला-केंद्रित कानूनों का दुरुपयोग और उनकी संवेदनशीलता
महिला-केंद्रित कानूनों के इस तरह के जबरन वसूली घोटालों की चपेट में आने के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- सुरक्षा के लिए सख्त नियम: समाज में महिलाओं को अधिक असुरक्षित (Vulnerable) माना जाता है, इसलिए उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए इन कानूनों को बहुत सख्त और शक्तिशाली बनाया गया है।
- सामाजिक दृष्टिकोण: समाज अक्सर महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह रखता है और कानूनी ढांचा इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए बनाया गया है।
- कानूनी खामियां (Legal Loopholes): अपराधी इन सुरक्षात्मक नियमों को ढाल के बजाय ‘जबरन वसूली के हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वे जानते हैं कि इन कानूनों के तहत लगाए गए आरोप बहुत गंभीर होते हैं, जिसका फायदा उठाकर वे पीड़ितों को डराते हैं और समझौते के नाम पर भारी रकम वसूलते हैं।
- सामाजिक प्रभाव: स्रोतों में यह चिंता जताई गई है कि ऐसी महिलाएँ जो महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करती हैं, वे समाज में वास्तविक पीड़ितों के प्रति अविश्वास की स्थिति पैदा करती हैं। इन कानूनों को इसलिए बनाया गया था क्योंकि समाज में महिलाएँ अधिक संवेदनशील (Vulnerable) मानी जाती हैं, लेकिन यहाँ इनका उपयोग पैसे वसूलने के लिए किया गया।
- इस तरह के लोग उन सुरक्षात्मक कानूनों की गरिमा को नुकसान पहुँचाते हैं जो समाज में वास्तव में असुरक्षित महिलाओं की मदद के लिए बनाए गए हैं।
- शबनम जैसी महिलाएँ समाज में उन वास्तविक पीड़ित महिलाओं के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं जिनके लिए महिला-केंद्रित कानून बनाए गए थे।
