बड़ी खबर: 1,500 करोड़ रुपये के अंतर्राज्यीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़: 9 आरोपी गिरफ्तार
गुजरात की राजकोट पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने पूरे देश में साइबर ठगी का जाल बिछा रखा था। इस मामले में लगभग ₹1500 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह बैंकिंग नियमों की खामियों का फायदा उठाकर सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी कर रहा था।
क्या है मामले??
- पुलिस जांच में सामने आया कि यह बहु-राज्यीय (Multi-State) साइबर ठगी गिरोह था।
- कुल गिरफ्तारियां: हाल ही में गुजरात के राजकोट जिले से 3 आरोपियों (आदिलुद्दीन मोहम्मद, मिहिर रंगानी और हिरेन लिंबसिया) की गिरफ्तारी के साथ कुल संख्या 9 हो गई है।
- घोटाले की राशि: प्राथमिक जांच में लगभग 1,500 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
- शिकायतें: इस गिरोह के खिलाफ अब तक विभिन्न राज्यों से लगभग 180 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
- नेटवर्क: यह गिरोह गुजरात, तेलंगाना और अन्य राज्यों में फैला हुआ था।
काम करने का तरीका (Modus Operandi)
गिरोह कैसे करता था साइबर फ्रॉड
जांच एजेंसियों के अनुसार ठग कई तरीकों का इस्तेमाल करते थे:
(1) म्यूल बैंक अकाउंट (Mule Accounts)
- ठगों ने बहुत ही शातिराना तरीके से पैसे को घुमाने के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) का इस्तेमाल किया:
- फर्जी बैंक खाते: गिरोह ने APMC (कृषि उपज मंडी समिति) से जुड़ी कंपनियों के नाम पर 15 फर्जी बैंक खाते खोले।
- गरीब या अनजान लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
- इन खातों के जरिए ठगी का पैसा इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था।
(2) फर्जी ऑनलाइन निवेश योजना
- लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था।
- ऐप या वेबसाइट बनाकर नकली निवेश प्लेटफॉर्म चलाए जाते थे।
(3) सोशल मीडिया और कॉल सेंटर
- व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क किया जाता था।
- कॉल सेंटर से लोगों को कॉल करके निवेश या स्कीम का लालच दिया जाता था।
- अपराध का मिश्रण: इन खातों का उपयोग केवल साइबर ठगी के लिए ही नहीं, बल्कि अवैध सट्टेबाजी (Gambling) और टैक्स चोरी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए भी किया जा रहा था।
(4) फर्जी दस्तावेज और सिम कार्ड
- नकली सिम कार्ड और पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाता था।
- कई राज्यों में अलग-अलग खातों के जरिए पैसे घुमाए जाते थे।
- नियमों का फायदा: उन्होंने जानबूझकर कृषि से जुड़े खातों को चुना क्योंकि इनमें GST और TDS के नियम थोड़े सरल होते हैं, जिससे भारी लेनदेन पर बैंक का ध्यान जल्दी नहीं जाता।
- अंगड़िया सिस्टम: ठगी गई राशि को इन खातों में जमा करने के बाद, पारंपरिक ‘अंगड़िया’ (कूरियर) नेटवर्क के जरिए नकदी के रूप में निकाला या इधर-उधर किया जाता था।
जांच में क्या-क्या मिला
पुलिस जांच के दौरान कई अहम चीजें बरामद हुईं:
- मोबाइल फोन
- सिम कार्ड
- एटीएम कार्ड
- कई बैंक खातों की जानकारी
- ऑनलाइन लेन-देन के रिकॉर्ड
इन सबका इस्तेमाल साइबर अपराध करने में किया जा रहा था।
कितने राज्यों में फैला था नेटवर्क
जांच में पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था, जैसे:
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- दिल्ली
- राजस्थान
- कर्नाटक
- अन्य राज्य
इसलिए इसे मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क कहा जा रहा है।
पुलिस और एजेंसियों की कार्रवाई
पुलिस और प्रशासन इस मामले में बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं:
- टेक्निकल ऑडिट: साइबर एक्सपर्ट्स बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स और सर्वर लॉग्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि घोटाले की अंतिम जड़ तक पहुंचा जा सके।
- संपत्ति की कुर्की: जांच एजेंसियों का अगला कदम आरोपियों द्वारा अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति को जब्त करना है।
- अंतर्राज्यीय समन्वय: गुजरात पुलिस अन्य राज्यों (जैसे तेलंगाना) की पुलिस के साथ मिलकर मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
- बैंकों को निर्देश: संदिग्ध खातों और लेन-देन के पैटर्न को लेकर बैंकों को अलर्ट किया गया है ताकि ‘म्यूल अकाउंट्स’ पर लगाम लगाई जा सके। और संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया गया है।
- आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।
- डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है।
- अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर जांच बढ़ाई जा रही है।
- गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है।
सरकारी नीति और सुरक्षा उपाय (Policy & Prevention)
साइबर अपराधों को रोकने के लिए भारत सरकार की वर्तमान नीतियां इस प्रकार हैं:
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल:नागरिक 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre): यह केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर साइबर अपराधों पर नजर रखता है। सरकार ने अब तक लाखों संदिग्ध सिम कार्ड और IMEI नंबर ब्लॉक किए हैं।
- हेल्पलाइन नंबर 1930: यदि आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत इस नंबर पर कॉल करें। शुरुआती 1-2 घंटों (Golden Hour) में सूचना देने पर पैसा वापस मिलने की संभावना अधिक होती है।
- डिजिटल अरेस्ट से सावधान: सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी (CBI, NCB, RBI) वीडियो कॉल पर किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है।
- बैंक खातों की निगरानी:संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर तुरंत अलर्ट जारी किया जाता है।
- डिजिटल जागरूकता अभियान:लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
- इंटर-स्टेट पुलिस सहयोग:अलग-अलग राज्यों की पुलिस मिलकर ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करती है।
आम जनता के लिए सुझाव/सावधानियां (Safety Tips)
- किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP या बैंक डिटेल्स न दें
- सोशल मीडिया पर आने वाली निवेश स्कीम से सावधान रहें
- संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड न करें
- ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें
- खाता किराए पर न दें: कभी भी कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। यह आपको जेल भिजवा सकता है।
- अनजान लिंक से बचें: निवेश पर भारी रिटर्न या लॉटरी के झांसे में आकर किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- KYC अपडेट: बैंक कभी भी फोन पर आपसे पिन या ओटीपी नहीं मांगते।
- रिपोर्ट करें: किसी भी साइबर संदिग्ध गतिविधि की जानकारी [1930 या cybercrime.gov.in] पर दे
₹1500 करोड़ का यह साइबर फ्रॉड भारत में बढ़ते डिजिटल अपराध की गंभीरता को दिखाता है। पुलिस की कार्रवाई से गिरोह के कई सदस्य पकड़े गए हैं, लेकिन जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए देशभर में अभियान चलाया जा रहा है।
